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वैसे तो स्वतंत्रता आंदोलन के दौर के इतिहास में महिला मुद्दों के लिए संघर्षरत महिलाओं की चर्चा ही कम मिलती है। उसमें भी ग्रामीण इलाकों में रहने वाली, विशेषकर बहुजन महिलाओं के संघर्षों की चर्चा के लिए हमारे बौद्धिक दुनिया में हाशिए पर भी जगह नहीं है। जबकि विभिन्न मुद्दों को लेकर विविध रूपों में उनका संघर्ष जारी था। इसी तरह के एक संघर्ष का दस्तावेजीकरण है पुष्पा कुमारी मेहता की पुस्तक ‘इसलामपुर की शिक्षा-ज्योति कुन्ती देवी’। यह पुस्तक बिहार की उस स्त्री की जीवन-कथा है, जिसके भीतर समाज को बदलने और महिलाओं को गरिमामय जीवन के लिए तैयार करने का ख्वाब जन्म लिया। उन्हें लगा कि यह ख्वाब महिलाओं के शिक्षित करके ही पूरा किया जा सकता है। कुंती देवी स्त्रियों को अनपढ़ नहीं देखना चाहती थीं। उनके भीतर आजादी के पूर्व ही आजादख्याली बसती थी। वह एक कृषक बाला थीं, जिन्होंने अपने कर्म से न सिर्फ बिहार राज्य के पूरे इसलामपुर क्षेत्र को प्रभावित किया,बल्कि स्थानीय स्त्रियों के लिए पूणे की सावित्रीबाई फुले की तरह प्रेरणा-स्रोत बन गईं। किताब के फ्लैप पर बताया गया है “ कुती देवी की कहानी 1930 के दशक दौरान बन रहे नए भारत की कहानी है। उनका विवाह 8 वर्ष की ही अवस्था में केशव दयाल मेहता से हुआ। विवाह के समय मेहता की उम्र 18 वर्ष की थी। इस दंपत्ति को अपनी शिक्षा के लिए बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। नए बन रहे भारत को सबसे अधिक आवश्यकता शिक्षा और स्वास्थ्य की थी। अधिसंख्य आबादी इन दोनों अन्योन्याश्रित चीजों से वंचित थी। निरक्षरता और और बीमारियों का बोलबाला था। स्कूल और अस्पताल बहुत कम थे। नए भारत के निर्माण के आवश्यक था कि समाज में – विशेषकर पिछड़े- दलित समुदायों में जीवन के प्रति अनुराग उत्पन्न हो। यह तभी संभव था, जब लोग स्वस्थ और शिक्षित हों, विशेषकर महिलाएं और बच्चे प्रसन्न हों। इस कमी को पूरा करने के लिए कुंती देवी ने बिहार के नालंदा जिले के कतरीसराय और इसलामपुर कस्बे में बालिकाओं के लिए स्कूल की स्थापना की, जबकि उनके पति ने वहीं भारतेंदु औषधालय बनाया। इन सबके पीछे मकसद था – सामाजिक व लैंगिक भेदभाव की बीमारी का उन्मूलन तथा एक स्वस्थ भारत का निर्माण। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है, यह उनका तकिया कलाम था और स्वस्थ रहो, शिक्षित बनो, उनका नारा था।” समाज आगे बढ़े, यही सूत्र वाक्य रहा मेहता दंपत्ति, यानी लेखिका के माता-पिता का। आजीवन वे इसी सूत्र वाक्य का अनुपालन करते रहे।
Bahujan, Islampur, http://id.loc.gov/authorities/subjects/sh99001470, Education in british india, Social justice--India, Bihar, http://id.loc.gov/authorities/names/n2018240819, Kunti Devi
Bahujan, Islampur, http://id.loc.gov/authorities/subjects/sh99001470, Education in british india, Social justice--India, Bihar, http://id.loc.gov/authorities/names/n2018240819, Kunti Devi
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