
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भारत की अधिकार-आधारित ग्रामीण रोजगार नीति का प्रमुख आधार है। यह अध्ययन ग्रामीण रोजगार सृजन, आय सुरक्षा, सामाजिक समावेशन, परिसंपत्ति निर्माण तथा प्रशासनिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में मनरेगा की प्रभावशीलता की नीतिगत समीक्षा करता है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम ने कृषि के अवकाश काल में रोजगार उपलब्ध कराने, महिलाओं तथा वंचित समुदायों की श्रम भागीदारी बढ़ाने, स्थानीय मजदूरी पर सकारात्मक दबाव बनाने और जल, भूमि तथा सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण में उपयोगी भूमिका निभाई है। इसके प्रभाव को रोजगार की अपर्याप्त उपलब्धता, मजदूरी भुगतान में विलंब, स्थानीय संस्थागत क्षमता की कमी, डिजिटल बहिष्करण, कमजोर सामाजिक अंकेक्षण और राज्यों के बीच असमान कार्यान्वयन सीमित करते हैं। समीक्षा का निष्कर्ष है कि समयबद्ध वित्तपोषण, मांग का सही पंजीकरण, स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण, पंचायतों की तकनीकी क्षमता, डेटा-आधारित योजना और कृषि व जलवायु-अनुकूल कार्यों के साथ बेहतर समन्वय कार्यक्रम की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं।
