
मध्यकालमे मिथिला आ नेपाल जकाँ आसाममे सेहो मैथिली नाटकक विकास भेल। एहि नाटक सभमेसँ 15 गोट नाटकक सम्पादन कऽ श्री विरंची कुमारबरूआ प्रकाशित करौलन्हि, एहि संग्रहक नाम ‘अंकिया नाट‘ रखलन्हि। यद्यपि एहि नाट्य संग्रहक नाम अंकिया अछि मुदा एकरा रूप विभाजनसँ कोनो सरोकार नहिं अछि। प्रायः आँगिक शब्दक भ्रष्ट रूपकें अंकिया कहल जाइत अछि।
