Powered by OpenAIRE graph
Found an issue? Give us feedback
image/svg+xml art designer at PLoS, modified by Wikipedia users Nina, Beao, JakobVoss, and AnonMoos Open Access logo, converted into svg, designed by PLoS. This version with transparent background. http://commons.wikimedia.org/wiki/File:Open_Access_logo_PLoS_white.svg art designer at PLoS, modified by Wikipedia users Nina, Beao, JakobVoss, and AnonMoos http://www.plos.org/ ZENODOarrow_drop_down
image/svg+xml art designer at PLoS, modified by Wikipedia users Nina, Beao, JakobVoss, and AnonMoos Open Access logo, converted into svg, designed by PLoS. This version with transparent background. http://commons.wikimedia.org/wiki/File:Open_Access_logo_PLoS_white.svg art designer at PLoS, modified by Wikipedia users Nina, Beao, JakobVoss, and AnonMoos http://www.plos.org/
ZENODO
Report
Data sources: ZENODO
addClaim

उपनिषदों में योग : एक जीवन पद्धति

Authors: नीरज कुमार;

उपनिषदों में योग : एक जीवन पद्धति

Abstract

भारतीय ज्ञान-परम्परा में उपनिषदों का विशेष स्थान है। इनको वेदों का ज्ञानकाण्ड माना जाता है। इनमें आत्मा, ब्रह्म, मोक्ष, यौगिक क्रियाएं जैसे- तप, स्वाध्याय, आसन, प्राणायाम, मुद्रा-बन्ध, आदि के गूढ सिद्धान्तों व विधियों का प्रतिपादन मिलता है। उपनिषदों में योग का स्वरूप अत्यन्त गम्भीर और व्यापक है। यहाँ योग सिर्फ आसन, प्राणायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मानुशासन, ध्यान, आत्मसाक्षात्कार के साथ-साथ आरोग्य प्राप्ति का भी मार्ग है। उपनिषदों में वर्णित योग मनुष्य को स्वास्थ्य प्रदान करने के साथ-साथ आध्यात्मिक मार्ग पर भी लेकर जाता है। यह मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन का समग्र विकास करता है। जिसमें मनुष्य की शारीरिक शुद्धि, मानसिक शुद्धि, नैतिकता तथा आध्यात्मिक उन्नति आदि शामिल है। इस दृष्टि से उपनिषदों में वर्णित योग को एक जीवन पद्धति कहा जा सकता है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सन्तुलन स्थापित करता है। उपनिषद् भारतीय दर्शनशास्त्र का दर्पण और आध्यात्मिक विज्ञान का प्राणस्वरूप है। वैदिक वाङ्मय के क्रम में आरण्यक ग्रन्थों के बाद उपनिषदों का स्थान आता है। वेद तथा ब्राह्मण ग्रन्थों के बाद होने से उपनिषदों को वैदिक साहित्य का महत्त्वपूर्ण अंग कहा गया है। उपनिषदों को वेदों का अन्त भाग होने से वेदान्त भी कहा जाता है। उपनिषद् शब्द ‘उप’ (समीप) ‘नि’ (नीचे) एवं ‘सद्’ (बैठना)। इन तीनों के सहयोग से बना है, जिसका अर्थ है- गुरु के समीप बैठना। अर्थात् शिष्यों का गुरु के समीप ध्यानपूर्वक उपदेश सुनने के लिए बैठना, जिससे शिष्य की अविद्या का नाश होता है तथा उसे ब्रह्मविद्या की प्राप्ति होती है। उपनिषदों की संख्या के बारे में निश्चित नहीं कहा जा सकता कि कितनी है? क्योंकि इसकी संख्या में भेद मिलता है- कहीं पर संख्या 200 बताई गई है, तो कहीं इनसे भी अधिक बताई गई है, लेकिन मुक्तिकोपनिषद् में 108 उपनिषदों को गिनाया गया है, जो प्रामाणिक है।1 उपनिषदों पर प्राचीन भाष्य शंकराचार्य का है। इन्होंने भाष्य के लिए केवल 10 मुख्य उपनिषदों को चुना है। ये ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य एवं बृहदारण्यक उपनिषद् हैं।2 इनमें योग की चर्चा कहीं-कहीं की गई है, लेकिन इसके अलावा 21 उपनिषद् ऐसे हैं, जिसमें सिर्फ योग की चर्चा की गई है। इनके संग्रह को योग उपनिषद् कहते हैं। इनमें से योगराज उपनिषद् अप्रकाशित तथा अन्य 20 उपनिषद् प्रकाशित हैं।

Powered by OpenAIRE graph
Found an issue? Give us feedback