
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में अध्यापक केवल ज्ञान के संप्रेषक ही नहीं, बल्कि सामाजिक एवं व्यक्तित्व विकास के प्रेरक भी माने जाते हैं। इसी संदर्भ में प्रस्तुत शोध का मुख्य उद्देश्य अध्यापकों की सामाजिक दक्षता तथा व्यक्तित्व कारको के पारस्परिक संबंध और उन पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करना है। सामाजिक दक्षता वह क्षमता है जिसके माध्यम से व्यक्ति विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों में प्रभावी, संतुलित तथा उत्तरदायी व्यवहार प्रदर्शित करता है, जबकि व्यक्तित्व अध्यापक के स्थायी मनोवैज्ञानिक गुणों और व्यवहारिक प्रवृत्तियों का समग्र रूप है। शोध में यह प्रतिपादित किया गया है कि अध्यापक की सामाजिक दक्षता व्यक्तित्व कारकों से घनिष्ठ रूप से संबद्ध होती है। प्रस्तुत अध्ययन में सर्वेक्षण पद्धति का उपयोग करते हुए अध्यापकों के एक प्रतिनिधि नमूने से प्राप्त आंकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण किया गया। विश्लेषण के लिए माध्य, मानक विचलन तथा टी – परीक्षण एवं एफ-परीक्षण जैसी सांख्यिकीय तकनीकों का प्रयोग किया गया, जिससे विभिन्न समूहों के मध्य सामाजिक दक्षता और व्यक्तित्व कारकों से सम्बद्ध व्याख्या संभव हो सकी। अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि जिन अध्यापकों में सामाजिक दक्षता उच्च स्तरीय होती है, वे कक्षा-परिस्थिति में अधिक प्रभावी शिक्षण-अधिगम वातावरण का निर्माण करते हैं साथ ही उनमे कार्योंमुख व्यक्तित्व कारक भी उच्च स्तरीय होते है जो उन्हें विद्यालय कार्यों में प्रभावी, समायोजनशील, व्यवहारिक एवं समस्या समाधान योग्यता में दक्ष बनाते है| शोध निष्कर्ष यह भी संकेत करते हैं कि अध्यापक-प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सामाजिक एवं भावनात्मक दक्षताओं के विकास को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि अध्यापकों का व्यक्तित्व संतुलित, कार्योंन्मुख एवं संवेदनशील बन सके। इस प्रकार अध्यापकों में सामाजिक दक्षता और व्यक्तित्व के समन्वित विकास के माध्यम से न केवल शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता में वृद्धि संभव है, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास और सकारात्मक विद्यालयी संस्कृति के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
