
सारांश (Abstract) भारत तीव्र सामाजिक, आर्थिक एवं तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान समय में विकास की चर्चा केवल पारंपरिक रोजगार अवसरों तक सीमित न रहकर प्रौद्योगिकी-संचालित रोजगार सृजन, नवाचार तथा उद्यमिता पर केंद्रित हो गई है। इसके लिए सरकार द्वारा अगली पीढ़ी के राष्ट्रीय आधारभूत ढाँचे में निवेश, सुदृढ़ नीतिगत ढाँचे का निर्माण तथा विकासोन्मुख प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। भारत में इस दिशा में सकारात्मक पहल प्रारम्भ हो चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप निजी क्षेत्र के लिए भी बहु-ट्रिलियन डॉलर के व्यवसायों के निर्माण के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। यह प्रक्रिया नवाचार, उद्यमिता तथा समावेशी आर्थिक विकास को नई गति प्रदान कर सकती है। यह पुस्तक “ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया” विषय के अंतर्गत विभिन्न विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के बौद्धिक विचारों और शोध निष्कर्षों का संकलन प्रस्तुत करती है। पुस्तक में भारत की विकास नीतियों, गांधीवादी दर्शन एवं प्रौद्योगिकी-आधारित आधुनिक विश्व के मध्य समन्वय का विश्लेषण किया गया है। इसमें नई शिक्षा नीति, आत्मनिर्भर भारत अभियान, महिला सशक्तिकरण, सतत विकास, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा का अधिकार तथा स्वस्थ जीवन शैली जैसे समकालीन और विकासोन्मुख विषयों पर कुल 42 शोधपत्र सम्मिलित किए गए हैं। यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों तथा नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री प्रदान करती है और बदलते भारत की संभावनाओं एवं चुनौतियों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
