
प्रस्तुत शोध-पत्र समकालीन समाज में मीडिया के बदलते स्वरूप, उसकी चुनौतियों और उसके नैतिक आयामों का विश्लेषण जैन दर्शन के मूलभूत संबंध-सिद्धांतों में से छह सिद्धांतों के आधार पर करता है। ये छह सिद्धांत हैं— प्रतिपाद्य-प्रतिपादक संबंध, ज्ञाप्य-ज्ञापक संबंध, वेद्य-वेदक संबंध, बन्ध्य-बन्धक संबंध, स्व-स्वामी संबंध तथा व्याप्य-व्यापक संबंध। शोध का मुख्य तर्क यह है कि मीडिया की समस्याएँ— फेक न्यूज़ (Fake News), डिजिटल लत, सांस्कृतिक विघटन और नैतिक संकट — केवल तकनीकी नहीं हैं, बल्कि दार्शनिक भी हैं; और इनका समाधान भी दर्शन में निहित है। अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि जैन दर्शन के संबंध-सिद्धांत मीडिया और समाज के बीच विद्यमान जटिल संबंधों को समझने का एक प्रभावी वैचारिक आधार प्रदान करते हैं। ये सिद्धांत सत्य, उत्तरदायित्व, संतुलन, सह-अस्तित्व तथा नैतिकता जैसे मूल्यों पर बल देते हैं, जो समकालीन मीडिया की चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस प्रकार यह शोध मीडिया अध्ययन और जैन दर्शन के मध्य एक सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रयास करता है तथा यह स्पष्ट करता है कि आधुनिक डिजिटल युग की समस्याओं का समाधान केवल तकनीकी सुधारों से नहीं, बल्कि नैतिक एवं दार्शनिक दृष्टिकोण के समावेश से भी संभव है।
