
जैनेन्द्र कुमार हिंदी कहानी साहित्य के प्रमुख मनोवैज्ञानिक कथाकार हैं। उनकी कहानियों में मानव-मन की सूक्ष्म संवेदनाओं के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना और आस्तिकता का भी प्रभावशाली चित्रण मिलता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में जैनेन्द्र की विभिन्न कहानियों— “फोटोग्राफी”, “अंधे का भेद”, “दिल्ली में”, “भाभी”, “एक टाइप”, “लाल सरोवर”, “कः पंथा” तथा “वह गँवार” आदि के आधार पर आस्तिकता की अभिव्यक्ति का अध्ययन किया गया है। इन कहानियों के पात्र ईश्वर में गहरा विश्वास रखते हैं तथा जीवन के सुख-दुःख, संकट, वैराग्य, प्रायश्चित और आत्मिक शांति के क्षणों में ईश्वर का स्मरण करते दिखाई देते हैं। कहीं ईश्वर सर्वव्यापक सत्ता के रूप में उपस्थित है, तो कहीं वह मानसिक संबल और नैतिक चेतना का आधार बनता है। जैनेन्द्र की कहानियों में आस्तिकता केवल धार्मिक विश्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मानवीय संवेदना, आत्मानुभूति और जीवन-दर्शन से गहराई से जुड़ी हुई है। उनके पात्रों के माध्यम से आस्था, आत्मसंघर्ष, नैतिक मूल्य तथा आध्यात्मिक चेतना के विविध आयाम उद्घाटित होते हैं। इस प्रकार, उनकी कहानियाँ आस्था और मानवीय अनुभूति के गहन संबंध को उद्घाटित करती हैं तथा समकालीन सामाजिक एवं दार्शनिक परिप्रेक्ष्य में आस्तिकता के महत्व को रेखांकित करती हैं।
