
भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है, परंतु जब कोई व्यक्ति कारागार में होता है तो उसके अधिकारों की स्थिति एक जटिल प्रश्न बन जाती है। यह शोध पत्र कैदियों के संवैधानिक अधिकारों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 20, 21 एवं 22 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों की विवेचना की गई है। उच्चतम न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों के ऐतिहासिक निर्णयों का अध्ययन करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि कारावास की अवस्था में भी मनुष्य के आधारभूत गरिमा एवं जीवन के अधिकार का हनन नहीं हो सकता। जेल सुधार, विचाराधीन कैदियों की समस्याएँ, त्वरित सुनवाई का अधिकार एवं मानवोचित व्यवहार जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस शोध का उद्देश्य यह बताना है कि कानूनी व्यवस्था को कैदियों के मूल अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील एवं जवाबदेह होना चाहिए।
