
21वीं सदी का शिक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास, वैश्वीकरण और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था ने शिक्षण विधियों को भी प्रभावित किया है। पारंपरिक शिक्षक-केंद्रित पद्धति की जगह अब शिक्षार्थी-केंद्रित, सहभागितापूर्ण और तकनीक-समर्थित शिक्षण विधियाँ उभर रही हैं। इनमें गतिविधि आधारित शिक्षण और ब्लेंडेड लर्निंग विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। स्पष्ट है कि गतिविधि आधारित शिक्षण और ब्लेंडेड लर्निंग जैसी नवीन विधियाँ वर्तमान युग की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। ये न केवल ज्ञानार्जन को रोचक बनाती हैं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए भी तैयार करती हैं। तथापि, इनके प्रभावी उपयोग के लिए संतुलित दृष्टिकोण और व्यावहारिक सुधार आवश्यक हैं। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के बाद ब्लेंडेड लर्निंग जैसी शिक्षण विधियों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) ने भी डिजिटल शिक्षा और ब्लेंडेड लर्निंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। यह पद्धति भविष्य की शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।
