
भारतीय स्वतंत्रता का वर्ष केवल राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रतीक नहीं था, वरन देश के विभिन्न सामाजिक और मानवीय समाज के लिए एक नए युग का आरम्भ भी था। भारत के मूल निवासी आदिवासी समाज पराधीनता काल में लंबे समय तक ग्रसित रहा। मेरा उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद आदिवासी समुदाय का विवरण आपके समक्ष रखना है। आदिवासी समाज ने स्वतंत्रता के बाद अनेक परिवर्तनों का सामना किया है, जिनके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। लेकिन कुछ क्षेत्रों में पीड़ा, यातना और शोषण आज भी है। कुछ चुनौतियाँ आज़ादी से पहले थीं, वे आज भी हैं, बस उनका स्वरूप बदल चुका है। परिवर्तन और उपलब्धियों में संविधानिक अधिकार, आदिवासी समुदाय के लिए विशेष प्रावधान, विकास योजना, सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक नीतियों और मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष कार्यक्रम और उपक्रमों का कार्यान्वयन सरकार द्वारा किया जा रहा है। चुनौतियों में आदिवासी समाज के उन्नयन के लिए संवैधानिक प्रावधान, संरक्षण, नियम और कानून होने के बावजूद उनका खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। जंगल का सौदा, उजड़ते आदिवासी कबिले, कुपोषण, विस्थापन, और पेशा कानून के साथ खिलवाड़ आदि समस्याएँ आज भी बनी हुई हैं। आदिवासी समाज का भविष्य सरकार की नीतियों और कार्यान्वयन पर निर्भर करता है। आदिवासी समाज के उन्नयन के लिए विकास, संरक्षण, आधुनिकीकरण, सांस्कृतिक पहचान, आर्थिक प्रगति और आदिवासी समाज के बीच संतुलन स्थापित होना चाहिए । आदिवासी समाज के अधिकारों का रक्षण, परंपरा, मूल्य, पहचान का संरक्षण, शिक्षा, आरोग्य आदि में सरकार की देखरेख में भ्रष्टाचार मुक्त कार्यप्रणाली होनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति2020 के तहत विद्यालयों में मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा होनी चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों के विद्यालयों में पाठ्यक्रम में आदिवासी समुदाय के इतिहास, सभ्यता, आदिवासी नायकों आदि को शामिल किया जाना चाहिए। आधुनिक सुविधा के साथ छात्रावास होने चाहिए और उच्च शिक्षा तथा आधुनिक कार्य कुशलता से युक्त प्रशिक्षण होना चाहिए।
भारतीय स्वतंत्रता, आदिवासी समाज, भारतीय संविधान, सरकर, विकास, संरक्षण, आधुनिकीकरण, सांस्कृतिक पहचान, आदिवासी मूल्य, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, परिवर्तन, चुनौतियाँ, उपलब्धियाँ, पराधीनता, संवैधानिक रक्षा, वन अधिनियम, मूलभूत अधिकार, भू-राजस्व नीति, व्यापारिक नीतियाँ, रेगुलेटिंग एक्ट, पिट्स इंडिया एक्ट, मातृभाषा, नक्सलवाद, जल-जंगल-जमीन आदि।
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