
प्रस्तुत आलेख &पर्यावरण साहित्य और हरित चिंतन* में प्रकृति और मानव के अन्योन्याश्रित संबंधों तथा हिंदी साहित्य में निहित पर्यावरणीय चेतना का विश्लेषण किया गया है। लेखिका ने रेचल कर्सन की &साइलेंट स्प्रिंग* के संदर्भ से लेकर हिंदी साहित्य के विभिन्न कालखंडों में व्याप्त प्रकृति प्रेम को रेखांकित किया है। इसमें तुलसीदास द्वारा वृक्षारोपण, रहीम द्वारा जल संरक्षण, सुमित्रानंदन पंत के सुकुमार प्रकृति चित्रण और कबीर के पारिस्थितिकीय चिंतन का विशेष उल्लेख है। आलेख यह स्थापित करता है कि प्राचीन साहित्य में प्रकृति संरक्षण के सूत्र गहरे निहित हैं और &हरित चिंतन* को अपनाकर ही भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
