
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) ने प्राथमिक शिक्षा और प्राथमिक शिक्षकों के प्रशिक्षण में व्यापक बदलाव किए हैं, जो भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक समावेशी, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने का प्रयास है। NEP 2020 के तहत प्राथमिक शिक्षा को 5+3+3+4 संरचना में पुनर्गठित किया गया है, जिसमें फाउंडेशनल स्टेज (3-8 वर्ष) पर विशेष जोर है। इस स्टेज में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को शामिल किया गया है, जिसमें बच्चों को खेल-आधारित, अनुभवात्मक और मातृभाषा में शिक्षा दी जाती है।प्राथमिक शिक्षकों के प्रशिक्षण में अनुभव आधारित, बच्चों के विकास को समझने वाला और गतिविधि-आधारित शिक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षकों को बहुविषयक शिक्षा, मातृभाषा में शिक्षण, डिजिटल उपकरणों का उपयोग और श्रम विशिष्ट कौशल के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ICT कौशलों का समावेश किया गया है जिससे शिक्षक ऑनलाइन टूल्स एवं प्लेटफार्मों की मदद से प्रभावी शिक्षण कर सकें। NEP 2020 शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास पर बल देती है, जिसमें हर वर्ष न्यूनतम 50 घंटे के प्रशिक्षण और कार्यशालाओं की आवश्यकता है। समावेशी शिक्षा, कक्षा प्रबंधन, बच्चों की मानसिक और सामाजिक जरूरतों को समझना, और मूल्याधारित शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया गया है। इस नीति ने शिक्षकों को अनावश्यक प्रशासनिक कार्यों से मुक्त कर, उन्हें शैक्षिक प्राथमिकताओं पर केंद्रित रहने का अवसर दिया है।इस नीति के लागू होने से शिक्षण की गुणवत्ता मेंवृद्धि हुई है और शिक्षा प्रक्रिया अधिक बालकेंद्रित, समावेशी तथा गुणात्मक हुई है। राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्मों, जैसे दीक्षा और पीएम ई-विद्या, के माध्यम से लाखों शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा, नीति ने शिक्षा की पहुँच बढ़ाने, नामांकन में सुधार लाने, और ड्रॉपआउट दर कम करने संबंधित विभिन्न योजनाएं भी बनाई हैं।कुल मिलाकर, NEP 2020 ने प्राथमिक शिक्षा को आधुनिक बनाने, शिक्षकों के प्रशिक्षण में सुधार करने, और बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा को अधिक सुलभ, प्रभावी और समावेशी बनाने का एक ठोस मार्ग प्रशस्त किया है। यह नीति शिक्षकों को 21वीं सदी के शिक्षाशास्त्र, तकनीकी ज्ञान और बच्चों को समझने के कौशल विकास में सक्षम बनाती है, जिससे भारत की शिक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार होने की उम्मीद है।
